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सोमवार, 2 मई 2016

Jodhpur jodhpur jodhpur,,,

Jodhpur jodhpur jodhpur,,,

कुछ लडकिया कहती है की उन्हे jodhpur
के लड़के पसंद
नहीं
मैंने भी बोल दिया.....
शेरो के साथ शेरनिया अच्छी लगती है बंदरिया और
बकरिया नही......!
हम बादशाहो  बादशाह है इसलिए गुलामो जैसी हरकते नहीं,
नोटो पर फोटो हमारी भी हो सकती थी पर लोगो की जेब मे रहना हमारी फितरत नहीं..!!

एक लड़की स्वर्ग मे गयी: और
यमराज से बोली :
मेरी शादी किसी jodhpur के
लड़के से करवा दो..
यमराज : सब्र कर ले बेटी..
पहले jodhpur के
किसी लड़के को स्वर्ग मे तो आने दे. आज तक तो कोई आया नहीं.

सुधर जाओ कमीनों,
बात उपर तक पहुच गयी है।

टीचर ने jodhpur  के छात्रों से पुछा।
टीचर: एक बात बताओ, तुम    jodhpur वाले पढाई में ध्यान क्यों नहीं देते?
तो मै  बोला : क्योंकि पढाई सिर्फ दो वजहों से की जाती है।
1st खौफ  से
2nd शौख़ से
और,
फालतू के शौख हम  रखते नहीं और
डरते तो किसी के बाप से नहीं।/

jodhpur वाले  हो तो आगे भेजो। बाजार में नया है। 
Jodhpur jodhpur jodhpur
भले ही अपने दोस्त कम हैं पर जितने भी है,,,,
सब परमाणु बम हैं,,,

शनिवार, 21 नवंबर 2015

मारवाड़ी_का_दिमाग_दो_धारी_तलवार

मुम्बई में एक लडके की
अण्डों से भरी टोकरी
साईकिल के पत्थर से टकराने से टूट गयी !
भीड़ इकठी हुई
और
सभी चिलाये : देख कर चलो भाई , कितनी गन्दगी कर दी ?

एक काका ने
भीड़ से कहा : इतना चिलाने से अच्छा है
यह सोचो इसका मालिक इसकी क्या हालात करेगा?
पगार में से पैसे काट लेगा!
इसकी कुछ मदद करो !
लो मेरी तरफ से 10/रूपये !

सभी ने सहानभूति जताते हुए
10 -10 रूपये दिए!
लड़का खुश हो गया
क्यूंकि मिली हुई रकम
अण्डों की कीमत से ज्यादा थी !

सभी के चले जाने के बाद
एक व्यक्ति ने कहा : बेटे
काका ना होते
तो मालिक को तू क्या जवाब देता ?

लड़का : वो काका ही
मालिक है
और वो मारवाड़ी है !

#मारवाड़ी_का_दिमाग_दो_धारी_तलवार!



.

रविवार, 1 नवंबर 2015

जोधपुर राजवंश

जोधपुर राजवंश
1.राव सीहाजी (1273 ई.)
2.राव आस्थान(ईस्वी संवत 1272-1292)
3.राव धहड़ ( ईस्वी संवत 1292-1309 )
4.राव रायपाल (ईस्वी संवत 1309-1313?)
5.राव कनपाल (1313-1323?)
6.राव जालणसी (1323-1328 )
7.राव छाड़ाजी (1328-1344 )
8.राव टीडाजी (1344-1357 )
9.राव सालखाजी (1357-1374)
10.राव वीरमजी (1374-1383)
11.राव चुंडाजी "(1383-1423 )
12.राव कान्हाजी (1424-1427 )
13.राव सताजी(1424-1427 )
14.राव रीडमलजी (1427-1453 )
15.राव जोधाजी (जोधपुर के संश्थापक)(1453 -1489 )
16.राव सातल जी (1490-1492 )
17.राव सुजाजी
18.राव गांगाजी
19.राव मालदेव (1532-1562 )
20.राव चंद्रसेन (1562-1581) जिनकी तुलना महाराणा प्रताप से की जाती थी
21.राव रायसिंह (1582-1583 )
22.राजा उदयसिंह (1583-1595 )
23.राजा सूरसिंह (1595-1619 )
24.राजा गजसिंह (1619-1638 )
25.राजा जसवंतसिंह (1638-1658 )
26.राजा अजीतसिंह (1709-1724 )
27.राजा अभयसिंह (1724-1749 )
28.राजा रामसिंह (1749-1751 )
29.राजा बखतसिंह (1751-1752 )
30.राजा विजयसिंह (1752-1793)
31.राजा भीमसिंह (1793-1803)
32.राजा मानसिंह (1803-1842 )
33.राजा तख्तसिंह (1843-1873)
34.जसवंतसिंह २ (1873-1895 )
35.राजा सरदारसिंह (1895-1911 )
36.राजा सुमेरसिंह (1911-1918 )
37.राजा उम्मेदसिंह (1918-1947 )
38.राजा हनुवंतसिंह (1947-1952)
39.राजा गजसिंह ( 1952 ) वर्तमान

 

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

जोधपुर _सिर्फ_हमारा_डायमंड_ह

जोधपुर _सिर्फ_हमारा_डायमंड_है
वो "गर्मीयो" की शाम,
वो " नई सड़क " रो जाम,
वो "किला रोड" री हवा,
वो "गांधी हॉस्पिटल" की दवा,
वो "त्रिपोलिया" की शाँपींग,
वो "पपु चाट" रो " चाट,
वो " चटर पटर" री पानी पूड़ी,
वो " श्रीनाथ" री "पावभाजी,
वो " रमेश मद्रासी" रो डोसा,
वो " ज़िपसी" री थाली,
वो " किम बेकरी "रो केक,
वो " भामाशाह" रो " पान,
वो "रातानाडा संगम टी री चाय,
वो "सूर्या नमकीन"रो शाही समोसो,
वो "चौधरी नमकीन"रो मिर्चीबडो,
वो "रावत" री कचोरी,
वो "चतुर्भुज" रो गुलाब जामुन,
वो "मोहन जी" रो मालपुओ,
वो "शिव गौरी" रो शेक,
वो "मिश्री लाल होटल" री लस्सी,
वो "एस एम् एस स्कूल" के नजारे,
वो "शास्त्री सर्कल के ठंडे" फवारे,
वो "सरदारपूरा" की सडके,
जहा कितने "दिल" धडके,
वो मस्ती की बाते,
एडि ही आपणै "जोधाणे" की "यादे

बुधवार, 26 अगस्त 2015

रंगीलो राजस्थान

रंगीलो राजस्थान
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www.rajrangilo.blogspot.com
Blog Archive
▼  2015 (273)
▼  August (46)
पाछो जोधपुर
आ दातल्ली केडी
भासा दियो एक उलटे हाथ रो फोडिन्द
कंचन वरणी कामणी  चढ चौबारैे चाप
कुंडलिया छंद           
फ़ानी दुनिया ये , हैं अरमान भी अधूरे
लिख्यो न जावे लाड़की थारे ऊपर
पावणा
बावला हो गया के
कुचरनी
खंकोला
Marwari thitholi
घूंघट
मारवाड़ी समझाइश
मारवाङी गाँवा री हिँन्दी
म्हार हिवडा का हार
दिस इस स्नेक
मारवाड़ी गर्लफ्रैंड से गप्पें
छाणा
कलक्टर बण ग्यो।
राजस्थान की लड़की
बोलो धत तेरे की…!
चाल समोसो खुवा दे..
कैर
कानिया मानिया कुर्रर्ररररररर
महेंद्र सा नगर ने श्रद्धांजलि
जिवंता है
ई बातां मिनख भूलै कोनी...
भाईचारो मरतो दीखे, पईसां (रूपया )लारे गेला होग्या।...
एक- एक और लै लो.
सबु पेली
पियोडा हि रेवे .........
वीरता रो पर्यायवाची
रण पीरा रो पीर है
जग मे गणो उजास
मोटो काटो
लुगाई को थोबड़ो ...
गणित मे प्यार के दो शब्द
चेतावनी सुचना
दादा बा के समय के सुखी जीवन के सूत्र
जोधपुर के लड़के पसंद नही
शादी किसी जोधपुर लड़के से
जोधपुर वाले पढाई में ध्यान क्यों  नहीं देते?
जॉनी जॉनी यस पापा इन मारवाडी फ़्रॉम रोमोबा ..
डाटा
►  July (43)
►  June (27)
►  May (49)
►  April (38)
►  March (37)
►  February (11)
►  January (22)
►  2014 (20)

सोमवार, 27 जुलाई 2015

हम मारवाड़ी हैं

( हम मारवाड़ी हेँ )
"याद घणी आवे बिती री बाताँ,
गाँव रा गौना चरावता,
दडीयाँ रमता,
स्कूलोँ मेँ दाल बाटी खावता गेहूँ  लावता,
छोरियाँ ने बकरियाँ केर चीड़ावता,
टेक्टर री टोली लारे लमुटता,  खेल्डी रा खौखा खावता,
धोरिया  माथे गुड़ता,
मौरीया री पॉखा चुगता,
ढेंलडी़या लारे दौड़ता,
खैल्डे माथे हिंडो घालता,
धुड़ा रो घर बणाय रमता,
रौज माऊ कनू एक रूपियो लेर सकुल जावता,1⃣
बोल्टी रा बौरिया खावता ,
फाटोड़ी चडीया पेरन सकूल जावता,
सकुल मे बाणीया रा छोरा ने कूटता,
छाने छाने बिड़ीया रा टुकड़ा पिवता,
गणाय कुपाव चुगूने जावता,
लुगाईयां रे डगळ री ठोकता,
फागण मे चंग बजांवता,
दीवाली ने टीकड़ीयां फोड़ता,"

(यह हमारे बचपन की मारवाड़ी यादें हैं हम ईनको कभी भूल नही सकते हैं)

हम मारवाड़ी हैं

( हम मारवाड़ी हेँ )
"याद घणी आवे बिती री बाताँ,
गाँव रा गौना चरावता,
दडीयाँ रमता,
स्कूलोँ मेँ दाल बाटी खावता गेहूँ  लावता,
छोरियाँ ने बकरियाँ केर चीड़ावता,
टेक्टर री टोली लारे लमुटता,  खेल्डी रा खौखा खावता,
धोरिया  माथे गुड़ता,
मौरीया री पॉखा चुगता,
ढेंलडी़या लारे दौड़ता,
खैल्डे माथे हिंडो घालता,
धुड़ा रो घर बणाय रमता,
रौज माऊ कनू एक रूपियो लेर सकुल जावता,1⃣
बोल्टी रा बौरिया खावता ,
फाटोड़ी चडीया पेरन सकूल जावता,
सकुल मे बाणीया रा छोरा ने कूटता,
छाने छाने बिड़ीया रा टुकड़ा पिवता,
गणाय कुपाव चुगूने जावता,
लुगाईयां रे डगळ री ठोकता,
फागण मे चंग बजांवता,
दीवाली ने टीकड़ीयां फोड़ता,"

(यह हमारे बचपन की मारवाड़ी यादें हैं हम ईनको कभी भूल नही सकते हैं)

काळी- काळी उमड़ी कांठळ

काळी- काळी उमड़ी कांठळ            डॉ मदन सिंह राठौड़ काळी- काळी उमड़ी कांठळ, धवळा- धवळा अहो! धोरिया। गुडळा- गुडळा भुरज गहरावै, गैरा - गैर...

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