Monday, 12 December 2016

जोधपुर की संस्कृति

जोधपुर की संस्कृति

1-दो ब्रेड के बीच में मिर्ची बड़ा दबा के खाना यहाँ का खास ब्रेकफास्ट माना जाता  है.

2-मिठाई की दूकान पर खड़े-खड़े आधा किलो गुलाब जामुन खाते हुए जोधपुर में सहज ही किसी को देखा जा सकता है.
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3-गर्मी से बचाव के लिए चूने में नील मिला कर घर को पोतने का रिवाज़ सिर्फ और सिर्फजोधपुर में ही है.

4-बैंत मार गणगौर जैसा त्योंहार सिर्फ जोधपुर में मनाया जाता है,जिसमे पूरी रात सड़कों पर महिलाओं का राज़ चलता है.

5-दाल-बाटी-चूरमा के लिए जोधपुर में कहा जाता है....दाल हँसती हुई,चूरमा रोता हुआ ओर बाटी खिल-खिल होनी चाहिए.मतलब-दाल चटपटी-मसालेदार,चूरमा ढेर सारे घी वाला और बाटी सिक के तिडकी हुई होनी चाहिए.

6-पानी की सप्लाई शुरू होते ही घर का आँगन धोने का रिवाज़ जोधपुर में ही है.

7-हरेक गली के नुक्कड़ पर पानी पात्र की खुली कुण्डी जोधपुर में लगभग हर जगह मिल जायेगी,जहाँ  का बचा-खुचा भोजन गायों को डाला जाता है.

8-किसी भी काम को सीधे मना करने की आदत किसी भी "जोधपुरवालो" की नहीं होती...

9-यहाँ फास्ट फ़ूड के नाम पर पिज्जा-बर्गर से ज्यादा मिर्ची बड़ा और प्याज की कचौरी ज्यादा पसंद की जाता है.यहाँ कहा जाता है कि जोधपुर  में अखबारों से भी ज्यादा मिर्ची बड़े के बिक्री होती है.

10-सड़क पर लगे जाम में फँसने के बजाय जोधपुर के लोग पतली गालियों से निकल जाना पसंद करते हैं.

11 - सराफा बाज़ार    जोधपुर में एक ऐसी जगह है जहाँ ,जन्म लेने वाले बच्चे के सामान से ले कर अंतिम संस्कार तक का सामान मिल जाता है.

12 -  जोधपुर के ऑटो रिक्शा अपनी विशेष साज-सज्जा के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

13-"के.पी."...यानि खांचा पोलिटिक्स की ट्रिक खास जोधपुर वालो के अंदाज़ में है,जिसमे भीड़ से किसी भी आदमी को सबके सामने चुप चाप अलग कोने में ले जा कर सिर्फ इतना पुछा जाता है..कैसे हो आप?
इससे उस आदमी का महत्व उस भीड़ में बढ़ा दिया जाता है..

14 -जोधपुर  का खास जुमला है-"कांई सा" और "किकर"..इसका अर्थ है-कैसे हैं आप और इन दिनों क्या चल रहा है.

15 -"चैपी राखो"..इस शब्द कां जोधपुर मतलब है-जो काम कर रहे हो,उसमे जुटे रहो.

16 - मिर्ची बड़ा,मावे की कचौरी और दही की लस्सी पर हर जोधपुर वासी को गर्व है.

17- जोधपुरमें मिठाइयों की क्वालिटी उसमे डाली जाने वाली चीजों से नहीं आंकी जाती बल्कि इस से आंकी जाती है कि उनमे देसी घी कितना डाला गया है.

18-यहाँ की परंपरा में गालियों को घी की नालियाँ कहा जाता है.तभी तो यहाँ का बशीन्दा गाली देने पर भी नाराज़ नहीं होता,क्यों कि गाली भी इतने मीठे तरीके से दी जाती है,उसका असर ना के बराबर हो जाता है.

19-जोधपुर रोजाना 4 हज़ार किलो बेसन सिर्फ मिर्ची बड़े बनाने में खर्च होता है.

20-"संध्या काल में शुभ - शुभ बोलना चाहिए " इसीलिए यहाँ शाम होते ही लोग बड़े से बड़ा पान मुहँ में दबा लेतें है , जिससे केवल ॐ की ध्वनि ही उच्चारित हो सके...

21- जोधपुर के साफे  विश्व प्रसिद्ध है |

22- सर्दियो में हल्दी की घोट खास जोधपुर   की पहचान हे।       

23- कड़का कड़क कपडे  जोधपुर की पहचान हे।                  

24- सब को "सा"लगाकर बुलाना  जोधपुर की संस्कृति हे ।

25-जोधपुर  वालो से दोस्ती रखना मतलब पूरा दुनिया की जानकारी हाशिल करना हे।

  म्हारो प्यारो जोधपुर 

खम्मा घणी