Thursday, 4 August 2016

मुंडै चाती अर छाती राखो

आज कुछ गुदगुदाने वाली पंक्तियां पढ़ने को मिली ...
आप भी आनंद ले ....

अपनी *औकात* भूल कर दूसरों को *औकात* याद दिलाने वाले नेताओं पर एक करारा व्यंग

मुंडै चाती अर छाती राखो
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आपरी अणदेखी देख'र
खुद थरपीज्यो नेता बोल्यो
घोर कळजुग है
लोग हातै-बातै नीं रैया
*म्हे* चंगा भला नेता हां
लोग पण *म्हानै* नेता नी मानै
लोग कित्ता डोफा है
*म्हे*कित्तो काम करियो है
उण काम नै सड़कां माथै सोधै
नेट पर नीं देखै
जठै *म्हे* काम रो ढिग लगा राख्यो है !

नेता जी बोल्या
बातां में बात तो बा ई
जिकी *म्हे* करां
बाकीस क्यांरी बात
निरो बतंगड है !
कामां में काम तो बो ई
जिको *म्हे* करां
बाकीस क्यांरो काम
फगत कढी बिगाड़ है !

आप सगळा
बोला-बाला बैठ्या रैवो
*म्हारै* मनभांवतै काम माथै
थूक मत बिलोवो
फगत ताळी बजाओ
आपनै जे स्याणा 
समझदार कुहावणों है तो
आप *म्हारा* हुकुम मानता रैवो
मुंडै माथै चाती राखो
*म्हारी* करणीं माथै छाती राखो !

*म्हारी* किणी भी गळती माथै
आप बोलो मत
आप तो ओ मान'र चालो
बोलणों आप नै नीं
फगत *म्हानै* ई 'ज आवै
ओ भी मान'र चालो
कै *म्हे* गळती कर ई नीं सकां
गळती तो फगत आप इज करो !
*
[] ओम पुरोहित कागद

देश इन *मैं के रोग से ग्रस्त *औकात* बताने वाले लोगों से दुखी है

आपकी क्या राय है ????