Wednesday, 17 August 2016

संभाळ लेई

एक चुटकलो है - एकर एक डाक्टर रोटी खाण खातर घरे गयो और नर्स नै बोल्यो -

" कोई रोगी भोगी आवै तो संभाळ लेई "

डाक्टर रोटी खा गे पाछो आयो और नर्स नै पूछ्यो -

"कोई रोगी भोगी आयो गे ?"

जणा नर्स बोली - "एक खांसी गो मरीज आयो और मैं बीनै जुलाब गी गोळी दे दी "

डाक्टर बोल्यो - "बेटी आ किसी पैथी है ? होमियोपैथी में भी खांसी गो इलाज जुलाब कोनी और ना एलोपैथी में जिक्र है ....ना आयुर्वेद में कठै ही लिखेड़ो है कै .....खांसी में जुलाब गी गोळी देवो "

जणा नर्स बोली - " ओ देसी टोटको है .....अबै बो मरीज खांसणै पैली च्यार बार सोच सी "

डाक्टर बोल्यो - बात लाजमी है पण अगर कोई पेट दर्द गो मरीज आ ज्यावै .....तो बिंगो के इलाज है ?

जणा नर्स बोली -

" अगर कोई पेट दर्द स्यूं दौलड़ो हुगे पड़ै तो बिंगी आंख्या में मिर्च घाल देवो ....पेट दर्द भूल गे आँख मूसळन लाग जी और आंख्या गी दुवाई तो हर दूकान में लाधै "

तो आ तो हुगी मजाक की बात !

पण मोदीड़ै पाकिस्तान गो इलाज इं देसी टोटकै स्यूं ही करयो है ।

पाकिस्तान उठ सुवारी एक ही तसीयो
घालै -

"होय कश्मीर ....हाय कश्मीर "

सतर बरस हुग्या...... पण बिंयाई कश्मीर कश्मीर करतो आपणै पर धांस धांस गे .....खंखार गेरै !

अबै अण मोदीड़ै .....गिलगित और बलूचिस्तान नाम गी दो जुलाब गी गोळी टिका नाखी ।

शायद अबै धांसणै  स्युं पैली .....च्यार बार पैजामै गै बारै में सोच सी !!

पन्नरा अगस्त गी मोकळी मोकळी रामा श्यामा !!!